इक खयाल

ये नए नए कौन कहा से पैदा कर रहे है?
पेहेले से इतने नसीब यहाँ मर रहे है
दिखने में तो पढ़ेलिखे लगते हो भाई
इतनी सी बात समझ में नहीं आई?
जब तुम्हें खुद ही ये ज़िन्दगी पसंद नहीं
तो बच्चा कैसे पैदा कर सकते हो भाई?

एक देश जहा कुछ भी सही नहीं है
लगता है कुछ है, पर कुछ नहीं है
जहा शिक्षा से ले के खेतों तक
परवरिश से ले के गीतों तक
पसंद से ले के स्वार्थ तक
एहेसान से ले के प्यार तक सब कुछ गलत ही है
उस देश में किसी को जन्म देना सही नहीं, गलत ही है

–    कुशल खस्तः

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